07/05/17

श्वेत रक्त कोशिका

श्वेत रक्त कोशिका

श्वेत रक्त कोशिकायें (WBC), या श्वेताणु या ल्यूकोसाइट्स, मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाऐं हैं, जो संक्रामक रोगों और बाह्य पदार्थों से शरीर की रक्षा करती हैं। 
श्वेत रक्त कोशिकायें-ल्यूकोसाइट्स पांच प्रकार की होती हैं, लेकिन इन सभी की उत्पत्ति और उत्पादन अस्थि मज्जा की एक प्रबल जननक्षम-मल्टीपोटेंट, रक्तजननक्षम-हीमेटोपोईएटिक, मूल कोशिका-स्टेम सेल से होता है। श्वेत रक्त कोशिकाऐं पूरे शरीर में पाई जाती हैं, जिसमें रक्त और लसीका प्रणाली शामिल हैं।इनका निर्माण अस्थि मज्जा- बोन मॅरो में होता है। इसे शरीर के सिपाही के नाम से भी जाना जाता है। ये प्रतिजन-एंटीजन और प्रतिरक्षी-एंटीबॉडी का निर्माण करती है जो प्रतिरक्षा तंत्र में भाग लेती है। एक बार बनी हुयी प्रतिरक्षी-एंटीबॉडी जीवन पर्यंत नष्ट नहीं होती है। स्वेत रक्त कोशिकाओं का अपने स्तर से कम बनना ल्यूकेमिया कहलाता है जिसे हम ब्लड कैंसर भी कह सकते हैं। 
रक्त में श्वेत रक्त कोशिका-ल्यूकोसाइट्स की संख्या प्रायः किसी रोग का सूचक होता है। आमतौर पर रक्त की एक लीटर मात्रा में 4×109 से लेकर 1.1×1010 के बीच श्वेत रक्त कोशिकायें होती हैं, जो किसी स्वस्थ वयस्क में रक्त का लगभग 1% होता है।
स्वेत रक्त कोशिकाओं-ल्यूकोसाइट्स की संख्या में ऊपरी सीमा से अधिक हुई वृद्धि श्वेताणुवृद्धि या ल्यूकोसाइटोसिस कहलाती है जबकि निम्न सीमा के नीचे की संख्या को श्वेताणुह्रास या ल्यूकोपेनिया कहा जाता है। 
स्वेत रक्त कोशिकाओं-ल्यूकोसाइट्स के भौतिक गुण, जैसे मात्रा, चालकता और कणिकामयता, 
सक्रियण, अपरिपक्व कोशिकाओं की उपस्थिति, या श्वेतरक्तता (ल्यूकेमिया) की हालत में 
घातक ल्यूकोसाइट्स की उपस्थिति के कारण बदल सकते हैं।
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